अविश्वासजरूरी14 दिनों के नोटिस का नहीं हुआपालन वेंकैया नायडू


सभापति ने कहा कि प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में भी नहीं है और इसके लिए जरूरी 14 दिनों के नोटिस का भी पालन नहीं किया गया है।


Unbelievable 14 days notice did not follow: Venkaiah Naidu

नायडू ने रविवार को हुए हंगामे का जिक्र करते हुए कहा कि सदस्यों ने कोविड-19 संबंधी सामाजिक दूरी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया।

इसके अलावा उन्होंने उपसभापति हरिवंश के साथ बदसलूकी की। माइक उखाड़े गए और नियमों की पुस्तिका फेंकी गयी। उनके साथ अमर्यादित आचरण किया गया।

नायडू ने इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन को ‘नेम करते हुए उन्हें सदन से बाहर जाने को कहा। हालांकि, ब्रायन सदन में ही रहे।

उल्लेखनीय है आसन द्वारा किसी सदस्य को ‘नेम किये जाने पर उन्हें सदन से बाहर जाना होता है। नायडू ने कहा कि कल की घटना संसद खासकर राज्यसभा की प्रतिष्ठा को भी धूमिल करने वाली थी,

जिसमें सदस्य मेज पर खड़े हो गए और सदन में नृत्य तक किया। उन्होंने कहा अगर समय पर मार्शल को नहीं बुलाया गया होता तो उपसभापति के साथ क्या बर्ताव किया जाता, इसे लेकर उन्हें चिंता है।

इसके बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कल के हंगामे में असंसदीय आचरण को लेकर विपक्ष के 8 सदस्यों को सत्र के शेष समय के लिए निलंबित किए

जाने का प्रस्ताव पेश किया। इसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी।

निलंबित किए गए सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांगेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, आप के संजय सिंह, माकपा के केके रागेश और इलामारम करीम शामिल हैं।

इसके बाद भी सदन में विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुयी।

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